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हमारा बिहार

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बिहार... लालू प्रसाद यादव एवं उसकी पार्टी ने बिहार को नर्क बना दिया | बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में लालू यादव ने बिहार को जंगलराज की ओर धकेल दिया| सन 1995 से 2005 तक बिहार की स्थिति इतनी खराब कर दी जिससे बिहार के कल करखाने बंद हो गए लोगों का पलायन शुरू हो गया | 2005 के बाद नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री का पद संभाला और उसके बाद बिहार को काफी हद तक सुधारा| इनके कार्यकाल की प्रथम 5 वर्ष स्वर्णिम कार्यकाल में से एक है उस कार्यकाल में जंगलराज से मुक्ति मिली, अपराधियों पर लगाम लगाया, बिहार में सड़कों का जाल बिछा दिया परंतु बिहार में फैक्ट्रियां नहीं लगवा पाए ताकि बिहार के लोग बिहार में ही रोजगार करें, बिहार से पलायन रुके, बिहार आत्मनिर्भर बने|      बिहार को एक ऐसे ऊर्जावान मुख्यमंत्री की तलाश है जो बिहार में कल कारखाने, इंस्टीट्यूट-यूनिवर्सिटी लगवाएं | बिहार की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त कर सकें, जिस से बिहार के बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा हेतु दूसरे राज्य न जाना पड़े, बिहार के लोगों को बिहार में ही काम मिले... परंतु अफसोस कि बिहार में इस तरह का नेता दूर-दूर तक नज...

सिसवन से छपरा जाने मे होने वाली समस्या

सिवान जिले के रघुनाथपुर और सिसवन ब्लॉक किसी परिचय का मोहताज नहीं है! इस ब्लॉक में दर्जनों बड़े गांव तथा छोटे-छोटे कई गांव बसते हैं! रघुनाथपुर से सिसवन होते हुए छपरा जाने वाले रूट में दर्जनों बस- ट्रक चला करती थी इस रूट के बसों में सवारियों की कमी कभी नहीं हुई है, इस रूट से प्रतिदिन हजारों हजार की संख्या में लोग छपरा जाते हैं, किसी को छपरा से ट्रेन पकड़नी होती है, किसी को इलाज करवाना होता है, परंतु अब रघुनाथपुर- सिसवन से छपरा जाना दिल्ली जाने जितना दूर लगता है... बसे चलती नहीं और छोटी गाड़ियां थोड़ी थोड़ी दूर के लिए मिलती है जिसका भाड़ा 😟...             रघुनाथपुर- सिसवन से छपरा जाने वाले रास्ते में ताजपुर के पास नदी के ऊपर बना पुल क्रेक हो जाने के कारण इस रास्ते को बंद कर दिया गया है! इस रास्ते सिसवन से छपरा 40 किलोमीटर पड़ता था, इसके वैकल्पिक रास्ते के रूप में सिसवन से चैनपुर- रसूलपुर वाले रास्ते का इस्तेमाल होता रहा है जो सिसवन से छपरा लगभग 54 किलोमीटर पड़ता है! परंतु इस रास्ते को यह कह कर बंद कर दिया गया है की टोल गेट रसूलपुर से कुछ दूरी पर सिवान के...

21 अगस्त 21 की यात्रा वृतांत

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गोपालगंज से स्थानांतरण के बाद आज नए जगह जाने के दौरान मन में उल्लास नहीं उल्हास था नए जगह जा तो रहे थे पर मन विचलित था वहां पर ऐसा होगा, वहां पर वैसा होगा, सोचते हुए आगे बढ़ रहे थे l सिवान आया रोज का वही सिसवन ढाला बंद, आज भी बंद था 5 मिनट बाद ढाला खुला वहां से आगे बढ़े , टड़वा आया बाइक धीरे  हो गया टड़वा के रितेश जी  जो पहले गोपालगंज में साथ थे उनके घर को निहारते हुए आगे बढ़ गया पर रितेश जी दिखाई नहीं दिए l दिखते भी कैसे मैं तो आज समय से पहले था खैर आगे बढ़ा छोटपुर आ गया, आज से पहले जब भी निकलता था छोटपुर पहुंचने पर विनय जी जो अम्लोरी के थे उनके पास कॉल कर लेता था l यह जानने के लिए कि वो निकल चुके हैं या निकलने वाले हैंl फिर याद आया कि नहीं वह यहाँ नहीं है l यह जो रास्ता है...जहां से प्रतिदिन गुजरा करता था इस रास्ते से आज जाने का मन नहीं कर रहा था आज यह मुझे काटने के लिए दौड़ रहा था 😞 मैं तो चल रहा था परंतु यह रास्ता खत्म नहीं हो रहा था l अम्लोरी, सरसर,  मटिहानी, फिर बाईपास होते हुए आगे बढ़ रहा था परंतु मन विचलित, खोए हुए था l जिस रास्ते से चलने पर स्पीड चल...

✍गांव के बुजुर्गों का सम्मान

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      महाराणा प्रताप जी की 480 वीं जयंती के अवसर पर बुजुर्गों को समर्पित मेरा यह लेख..🙏🙏      इस लेख के माध्यम से मै अपने गांव के बड़े बुजुर्गों केे उस सपने पर प्रकाश डालूंगा जिसे अब लगभग तीन दशक बाद पूरा कर उनको सम्मान दिया गया है...            हमारे गांव के विकास में हमारे गांव के बड़े बुजुर्ग हमेशा तत्पर रहा करते थे, उनका एकमात्र सपना था कि गांव का चौराहा, जो इस गांव की शोभा बढ़ाया करता है  वहां पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप  की जिनकी शौर्य और वीरता जग जाहिर है उन की भव्य प्रतिमा लगे, ताकि हमारी भावी संताने प्रेरणा लेंं सके, हमारे गांव के प्रगति और लोकप्रियता का प्रकाश पूरे क्षेत्र में फैले।      गांव के बुजुर्ग एकजुट होकर कदम दर कदम आगे बढ़ रहे थे, कई वर्षों के प्रयास के बाद अंततः अपने सपनों को साकार करने का समय भी निश्चित कर लिया, नियत समय पर भूमि पूजन और नींव रखने की व्यवस्था की गई, प्रतिमा लगाने में बहुत सारे धन की आवश्यकता थी जो पूरा नहीं हो पा रही थी, उसे पूरा करने हेतु कुछ बड़े नामी-गिरामी श...

संक्षिप्त लेख✍ मेरा गांव...

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     सिवान जिले के दक्षिणी छोर पर सरयू नदी के किनारे श्री श्री 1008 श्री हरेराम ब्रह्मचारी जी महाराज की तपोभूमि, जो गंगपुर सिसवन के नाम से प्रसिद्ध एक सुंदर सा गांव है। इस गांव में लगभग हर जाति के लोग निवास करते हैं। गांव के पश्चिमी छोर पर सरयू किनारे भक्तिमय वातावरण और चिड़ियों की मधुर आवाज के बीच बाबा ब्रह्मचारी जी महाराज की कुटिया है, जहां का दृश्य देखते ही बनता है। वहां जाने के बाद समय इतनी जल्दी बीत जाती है कि पता ही नहीं चलता, मन खिल उठता है, प्रकृति ने उस स्थान को अपने हाथों से संजोया है, उस स्थान के साथ-साथ सरयू नदी का मनोरम दृश्य सुगम अनुभूति का अनुभव कराता है। यहां हर साल पौष के अमावस्या के दिन भंडारे का आयोजन बड़े धूम-धाम से कराया जाता है जिसमे गांव वालों की सहभागिता पूरी निष्ठा के साथ होती है।      गांव में स्थित हाई स्कूल के हरे-हरे घास का मैदान जहां सुबह से ही बच्चों और नौजवानों की मौजूदगी होती है, कोई दौड़ता है, तो कोई टहलता है, कोई योगा करता है, उसके बाद क्रिकेट का खेल शुरू होता है और फिर शाम को फुटबॉल का खेल, हर समय किसी न किसी की मौजूदगी, ...