21 अगस्त 21 की यात्रा वृतांत

गोपालगंज से स्थानांतरण के बाद आज नए जगह जाने के दौरान मन में उल्लास नहीं उल्हास था नए जगह जा तो रहे थे पर मन विचलित था वहां पर ऐसा होगा, वहां पर वैसा होगा, सोचते हुए आगे बढ़ रहे थे l सिवान आया रोज का वही सिसवन ढाला बंद, आज भी बंद था 5 मिनट बाद ढाला खुला वहां से आगे बढ़े , टड़वा आया बाइक धीरे  हो गया टड़वा के रितेश जी जो पहले गोपालगंज में साथ थे उनके घर को निहारते हुए आगे बढ़ गया पर रितेश जी दिखाई नहीं दिए l दिखते भी कैसे मैं तो आज समय से पहले था खैर आगे बढ़ा छोटपुर आ गया, आज से पहले जब भी निकलता था छोटपुर पहुंचने पर विनय जी जो अम्लोरी के थे उनके पास कॉल कर लेता था l यह जानने के लिए कि वो निकल चुके हैं या निकलने वाले हैंl फिर याद आया कि नहीं वह यहाँ नहीं है l यह जो रास्ता है...जहां से प्रतिदिन गुजरा करता था इस रास्ते से आज जाने का मन नहीं कर रहा था आज यह मुझे काटने के लिए दौड़ रहा था 😞 मैं तो चल रहा था परंतु यह रास्ता खत्म नहीं हो रहा था l अम्लोरी, सरसर,  मटिहानी, फिर बाईपास होते हुए आगे बढ़ रहा था परंतु मन विचलित, खोए हुए था l जिस रास्ते से चलने पर स्पीड चलाओ तो गोपालगंज में काम करनेे वाला कोई साथी मिल जाता या धीरे चलो तो पीछे से कोई साथ आ जाता था, जिनसे कल तक अन - बन था वह भी साथ चलते थे तो हिम्मत रहता था कि चलो अनबन है तो क्या है साथ तो है परंतु आज बिल्कुल वीरान था...वीरान 😟...मैं सच कहूं तो मुझसे इस रास्ते पर आज चला नहीं जा रहा था ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मेरा शरीर बिल्कुल...🥺 मेरा स्थानांतरण तो हुआ लेकिन मेरा स्थानांतरण मेरे घर से पूर्व सहित कहीं होता तो मुझे इतना दुख नहीं होता जितना आज हुआ है पर क्या करूं समय है इसके साथ चलना पड़ता l
      मैं थावे पहुंचकर मां भवानी के दरबार में गया, उन्हें पिछले 5 वर्ष बेमिसाल 5 वर्ष के लिए धन्यवाद सहित प्रार्थना किया कि आगे इससे भी बेहतर हो और पुराने लोग के यादों को भूल कर नए जगह अपने कर्तव्यों का पालन निष्ठा पूर्वक कर सकें ताकि आगे का भविष्य बेहतर हो l
      परंतु हम फिर मिलेंगे... 👍👍

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